नई दिल्ली। भारत आज बालिका दिवस मनना रहा है। कितना शर्मानाक है कि आज ही यूपी के लखीमपुरखीरी में एक बच्ची का शव खेत में मिला। बच्ची से दुष्कर्म की आशंका जताई जा रही है। लेकिन पुलिस इसकी पुष्टि नहीं कर रही। पुलिस का कहना है कि मृतक बच्ची के गले पर चोट के निशान हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद कोई खुलासा हो सकता है। ऐसे में सवाल है कि भारत की आधी आबादी कितना महफ़ूज है। 

उधर, एनएफएचएस-5 के आंकड़ों में एक ओर दर्दनाक बात सामने आई है। आंकडों के अनुसार, भारत में हर 25 में से एक महिला ने बताया कि वो अक्सर या कभी-कभी पति के हाथों यौन हिंसा का शिकार हुई है। इसके अलावा, कुछ सूबों में ये मुद्दा अन्य राज्यों से ज़्यादा चलन में है, और कर्नाटक, बिहार, पश्चिम बंगाल तथा असम इस सूची में सबसे ऊपर हैं।

सर्वे में 18 से 49 वर्ष के बीच आयु की कभी भी विवाहित रही (जो फिलहाल या पहले विवाहित थीं) महिलाओं से पूछा गया था कि उन्हें अपने पति की ओर से किस तरह की हिंसा का सामना करना पड़ा था।

26 राज्यों (तमिलनाडु, अरुणाचल प्रदेश, ओडिशा और जम्मू-कश्मीर के अलावा दूसरे केंद्र-शासित क्षेत्रों के आंकड़े एनएफएचएस-5 पोर्टल पर उपलब्ध नहीं थे) के आंकड़ों के आधार पर क़रीब 4 प्रतिशत महिलाओं ने बताया कि वो अक्सर या कभी-कभी अपने पति के हाथों यौन हिंसा का शिकार हुई हैं।

लेकिन ये प्रतिशत कर्नाटक (9.7 प्रतिशत), बिहार (7.1 प्रतिशत), पश्चिम बंगाल (6.8 प्रतिशत), और असम (6.1 प्रतिशत) में कहीं ज़्यादा है। एनएफएचएस-4 के डेटा के मुक़ाबले, जो 2015-16 में कराया गया था, अपने विवाह में यौन हिंसा का शिकार होने वाली महिलाओं का प्रतिशत, कर्नाटक में 6.3 से बढ़कर 9.7 प्रतिशत हो गया. उसकी अपेक्षा बिहार में ये प्रतिशत 12.2 से घटकर 7.1 प्रतिशत पर आ गया।

भारतीय क़ानून में मैरिटल रेप को अपराध नहीं माना जाता, हालांकि इस विषय पर अक्सर क़ानूनी और सामाजिक बहस होती रही है. दिल्ली हाईकोर्ट में फिलहाल कुछ याचिकाओं की सुनवाई चल रही है, जिनमें यौन उत्पीड़न कानूनों के तहत मैरिटल रेप के अपवाद को चुनौती दी गई है. व्यापक रूप से रिपोर्ट की जा रही इन सुनवाइयों के बीच, सोशल मीडिया में भी इस विषय पर बहस चल रही है. हैशटैग #MarriageStrike ख़ूब ट्रेण्ड कर रहा है, जिसे वो लोग बढ़ावा दे रहे हैं जिनका मानना है, कि महिलाओं को विवाह में ज़्यादा क़ानूनी अधिकार नहीं दिए जाने चाहिए।

इस संदर्भ में, एनएफएचएस-5 सर्वे इस बात को उजागर करता है, कि महिलाओं की अच्छी ख़ासी संख्या को विवाह में यौन हिंसा का सामना करना पड़ता है, लेकिन उन्हें कोई विशेष क़ानूनी सहारा नहीं दिया गया है।