तथागत गौतम बुद्ध के भारत में वंचितों का जीना मुहाल है। मनुवादियों के हौसले इतने बढ गए हैं कि भारत को मध्यकाल की तरह ले जा रहे हैं। ताजातरीन मामला बिहार का है। बिहार में हाल ही में जिला पंचायत चुनाव संपन्न हुए हैं। जो जीत गए हैं, वह जश्न मना रहे हैं। जो हार गए हैं। वें रंजिश निकाल रहे हैं। औरंगाबाद जिले में तो हारे हुए प्रत्याशी ने मानवता की हदें ही पार कर डाली है। औरंगाबाद जिले में पंचायत प्रमुख के पद के लिए चुनाव हारने वाले उम्मीदवार ने दो वंचित पुरुषों के साथ इस तरह की घिन्नौनी हरकत कर डाली। जिससे लगता ही नहीं कि हम सुशासन के 21 सदी के शासन में हैं या हजारों बरस पुराने मध्यकाल में। दरअसल, हुआ यह कि जिला पंचायत चुनाव मुखिया का चुनाव हार चुका बलवंत सिंह वंचितों पर टूट पडा।
वंचित पुरुषों के साथ मारपीट का उसका वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। बलवंत सिंह पर इल्जाम है कि उसने अपनी हार के लिए दलित समुदाय को दोषी ठहराते हुए दो शख्सों की पिटाई कर दी। बलवंत को खुन्नस थी कि पीडितों ने उसे कथित तौर पर उन्हें वोट नहीं दिया था।
वीडियो में बलवंत को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि उसने दो मतदाताओं को भुगतान किया, और उन्होंने भी उसे वोट नहीं दिया। वह मौखिक रूप से दो आदमियों को गाली देता है और उनके कान पकड़कर उठक-बैठक कर उन्हें दंडित करता है। फिर वह उनमें से एक पर शारीरिक हमला करता है और उसे जमीन पर थूकने और चाटने के लिए मजबूर करता है। वह उसे गर्दन से पकड़कर जमीन पर लेटे हुए देखा जा सकता है।
गिरफ्तारी के बाद पल्टवार करते हुए आरोपी बलवंत ने आपनी सफाई में कहा कि शराब के नशे में दोनों युवक उपद्रव कर रहे थे और दोनों के शांत होने पर उसने उन्हें सजा दी। हालांकि, वीडियो यह स्थापित करता है कि बलवंत उन्हें भुगतान करने की बात कर रहा था। जिले के पुलिस अधीक्षक कांतेश कुमार मिश्रा के निर्देश पर पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। मिश्रा ने वंचितों का भारत को बताया कि आरोपी को एससी/एसटी एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया है। इस एक्ट के मुताबिक पीडितों को मुआवजा भी दिला दिया गया है। तफ्तीश जारी है।

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