आशना लिद्दड महज 17 बरस की छोटी सी बच्ची। गुडियो से खेलने की उमर में आशना लिद्दड ने किताब लिख डाली। किताब का टाइटल -इन सर्च ऑफ ए टाइटल-। इतनी छोटी सी बच्ची और इतना गंभीर टाइटल ? आशना लिद्दड शहीद ब्रिगेडियर एसएल लिद्दड की लाडली है। पिता एसएल लिद्दड की शहादत के बाद बच्ची ट्वीटर पर खूब ट्रोल हुई।
इधर, बच्ची पिता को मुखाग्नि दे रही थी। उधर, कुछ बेगैरत उन्हें ट्रोल कर रहे थे। वजह ? इस बच्ची ने 8 अक्टूबर 2021 को ट्वीट कर आपने जज्बात सांझा किए थे। मासूम बच्ची के इन जज्बातों को बेगैरतों ने राजनीतिक रंगत देते हुए ट्रोल किया। वह भी उसके पिता के शहादत के मौके पर। इससे बडी बेशर्मी ओर नहीं हो सकती है? लेकिन बदलते भारत में यह हो रहा है। मजबूरन बच्ची आशना ने आपना ट्वीटर हैंडल डिलीट कर दिया। यह बैकफ्लैश है बच्ची आशना के ट्वीटर हैंडल डिलीट होने का। अब आगे।
ब्रिगेडियर एसएल लिद्दड पंजाब से बाबस्ता थे। फौज की नौकरी में जाने के बाद दिल्ली में रच बस गए थे। एससी कैटेगरी के शहीद ब्रिगेडियर एसएल लिद्दड दिल्ली की आबो-हवा में भले ही रच बस गए थे। लेकिन पंजाब का मोह कभी त्याग नहीं पाए थे। जब भी फुर्सत मिलती पंजाब में आपने पुरखों के गांव में जरुर आते और वक्त गुजराते। आपने गांव के बाशिंदों से मिलते और आपने अनुभव उनसे शेयर करते। इसलिए गांव के सरपंच का दावा है कि भले ही शहीद ब्रिगेडियर लिद्दड दिल्ली में रहते थे।
लेकिन उन का दिल गांव में बसता था। एससी कैटेगरी के शहीद ब्रिगेडियर किसी आरक्षण के माध्यम से ब्रिगेडियर जैसे बेहद महत्वपूर्ण औहदे पर नहीं पहुंचे थे। बल्कि आपनी काबलियत के चलते उन्होंने सेना का यह बडा औहदा हासिल किया था। अब बेगैरतमंदों का शहीद ब्रिगेडियर के अंतिम संस्कार के मौके पर बच्ची आशना को इस तरह से ट्रोल करना, क्या साबित करता है ? हालांकि बच्ची के समर्थन में शनिवार को कुछ लीडर, सिविल सोसाइटी के लोग और कुछ पत्रकार सामने आएं। लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। क्योंकि बच्ची आशना लिद्दड शुक्रवार को ही आपना ट्वीटर हैंडल डिलीट कर चुकी थी।
तथागत गौतम बुद्ध की भारतीय जमीन पर ऐसे बेगैरत भी बस चुके हैं। मानवता का जिन्हें अर्थ ही मालूम नहीं है। इन बेगैरतों का, मासूम बच्ची को उसके पिता की शहादत के मौके पर ट्रोल करना, ठीक उसी तरह से है। जिस तरह से सीडीएस जनरल विपिन रावत की शहादत का मजाक बनाना। सरकार अगर कुछ ही घंटों में शहीद जनरल रावत के गुनाहगारों को दबोच सकती है, तो शहीद ब्रिगेडियर एसएल लिद्दड की लाडली की वाइस ऑफ स्पीच के बुनियादी अधिकार का कत्ल करने वालों से भी सख्ती से निपटे। अन्यवा माना जाएगा कि भारत दो मुल्यों की एक दुकान है। जहां जात-पात के आधार पर इनसाफ मिलता है।
-मनोज नैय्यर
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