लोकसभा में हैं वंचित समाज की पैरवी करने वाले 131 सदस्य, क्या मृत्कों के लिए आवाज बुलंद करेंगे अनुसूचित सांसद ?
ब्यूरो रिपोर्ट
नई दिल्ली। संसद का शीतकालीन सत्र
सोमवार से शुरु हो जाने जा रहा है। यूपी के जंगल राज का मुद्दा संसद के सत्र में
कौन उठाएगा ? यह अहम सवाल है। यूपी के जंगल राज में वंचित किस तरह के बलिदान दे रहे हैं। बताती
है 5 दिन पहले की वारदात। इलाहाबाद के फाफामऊ तहसील के गांव मोहनगंज गोहरी में वंचित
परिवार की महिला और बच्ची से गैंगरेप के बाद हत्या कर दी गई थी। 25 नवंबर की सुबह
वारदात का खुलासा हुआ था। अंग्रेजी के बडे अख़बार इंडियन एक्सप्रेस ने
आपनी रिपोर्ट में गैंगरेप की पुष्टि की है। यूपी सरकार के अफसरों ने 11 के खिलाफ
मुकदमा दर्ज कर सिर्फ 8 को गिरफ्तार किया है। साथ ही थाना इंचार्ज और एक कांस्टेबल
को मुअत्तल कर बाकी काम कानून पर छोड दिया है।
किसी के मन की बात या जंगल राज के
मुखिया ने इस नरसंहार पर दुख दे दो शब्द नहीं बोले है। यह बदलते भारत की तस्वीर
है। हमें नहीं चाहिए बदलता भारत। हमें आपने राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले का भारत
चाहिए। संसद के दोनों सदनों में वंचित समाज की रहनुमाई 131 सांसद करते हैं। यूपी
से ही वंचितों के समाज के 17 सांसद हैं। क्या इन 17 में से कोई भी यूपी के जंगल
राज की बानगी से संसद को अवगत करवाएगा ? उधर, राष्ट्रीय लोकदल के नेता प्रशांत
कन्नौजिया ने वंचित परिवार की हत्या पर टिप्पणी करते हुए कटाक्ष किया है, ‘गाय हत्या पाप है, दलित हत्या माफ है ।’ प्रशांत कन्नौजिया ने 27 नवंबर को यह ट्वीट किया था।
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी
वाड्रा ने वारदात वाली जगह का दौरा किया था। साथ ही पीडित परिवार को सांत्वना भी
दी थी। सवाल है कि कांग्रेस लोकसभा में यूपी के जंगल राज के खिलाफ कोई प्रस्ताव
संसद में पेश करेगी? यह देखना होगा।
वैसे इलाहाबाद की इस वारदात के खिलाफ भारत में वंचितों की कोई बडी प्रतिक्रिया
देखने को नहीं मिली है। इससे भी –पासी- परिवार को इनसाफ मिलने में देरी हो सकती
है। साल 2012 में दिल्ली के निर्भया कांड के बाद पूरा भारत उबल गया था। वंचितों के
पूरे परिवार के कत्ल और बच्ची और उसकी मां के गैंगरेप के खिलाफ भारत क्यों नहीं
उबला। यह भी बडा सवाल है। कौन देगा इन सवालों के जवाब ? इससे जाहिर है कि वंचित समाज की चुनौतियां भविष्य में और कठिन होगी।
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