मैं हिन्दु नहीं हूं। मैं हिन्दु हो भी नहीं सकता। मैं इसलिए हिन्दु नहीं हूं, क्योंकि मुझे मंदिरों के पाखंड गंवारा नहीं है। मैं इसलिए हिन्दु नहीं हो सकता, क्योंकि हिन्दु एकवह धर्म है। जिसमें महिलाओं का कोई सम्मान नहीं है। हिन्दु धर्म का इतिहास देखे तो समझ में आएगा कि यह धर्म किस तरह से महिला विरोधी है। रमायन और महाभारत इसके बडे उदाहरण है। रामायन में हिन्दुओं के एक वर्ग ने दूसरे वर्ग की महिला का अपमान किया। लक्ष्मन-सरुपनखा प्रसंग। उसके बाद हिन्दुओं के दो वर्गों में जंग शुरु हुई। जंग खत्म हो गई, लेकिन नारी उत्पीडन खत्म नहीं हुआ। रमायन की नायिका सीता को बनवास दे दिया गया। अकेले छोड दिया गया। यहीं बात महाभारत में देखने के मिलती है। द्रोपदी का चीरहनन। मतलब साफ है कि हिन्दुओं में महिलाओं का कोई सम्मान नहीं है। हिन्दुओं के आज के दौर के गुरुओं ने आपनी किताबों में दूसरी महिलाओं के साथ दुष्कर्म का महिमागान किया है। वहीं सिस्टम आज बी बदस्तूर जारी है। इसलिए मैं हिन्दु नहीं हूं। मूलनिवासी हूं, आपने भारत का। मेरे बारत का यह कल्चर नहीं है।
मेरे भारत के अंदर स्त्री शिक्षा की
नींव राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले ने रखी थी। सवित्रीबाई फुले ने राष्ट्रपिता के इस
मिशन को आगे बढाया। बाबा साहेब डॉ. भीम राव अंबेदकर ने भी महिला शिक्षा को
सर्वोप्रिय माना। यह है मेरे भारत का इतिहास। यह मेरे महापुरुषों की प्रेरणा। आरएसएस
के चीप इन दिनों बहुत-बहुत दिन्दुतव-हिन्दुतव की रट लगाएं हुए हैं। मोहन भागवत ने इस कार्यक्रम में हिन्दुओं को एकजुट रहने और हिन्दुत्व के बारे
में कई बातें कहीं. मोहन भागवत ने कहा, आप देखेंगे कि
हिन्दुओं की संख्या कम हो गई है। हिन्दुओं की ताकत कम हो गई है। हिन्दुत्व का भाव
कम हो गया है। मोहन भागवत जी जब आप हैं ही, 15 प्रतिशत, तो आपनी ताकत और भाव को
उसी में खोजे। 85 फीसद तो बहुजन है। उसे हिन्दु मत बनाएं। हां, जिसको कुदरत से ज्यादा
मूर्ति पूजा में यकीन है। वह हिन्दु हो सकता है। मूलनिवासियों का वंधन तो –जोहार-
से होता है। जोहार ही रहना भी चाहिए।
26 मई 2014 के बाद से
बहुजनों की मॉब लिंचिंग हिन्दुतव के अभियान की नई शुरुआत थी। खुद हिन्दुओं ने ही
इसी साल अमेरिका में दो महीने पहले –डिस्मेंटलिंग हिन्दुतत्वा- के तहत प्रोग्राम
कर। इस अभियान की हवा निकाल दी थी। कितना पैसा और ताकत फूंक दी थी भारत में रहने
वाले 15 फीसद हिन्दुओं ने इस प्रोग्राम को रोकने के लिए। लेकिन प्रोग्राम हुआ और
दुनिया की समझ में आया कि बारत में हो क्या रहा है। रविवार को ही बंगलोर में
मुनव्वर फारुकी का शो रद्द करवाया गया। उससे यह भी जाहिर होता है कि आज देश में
संविधान विरोधी काम सरकारी स्तर पर हो रहे हैं। संविधान ने तो बुनियादी अधिकार और
अभिव्यक्ति की आज़ादी दे रखी है। लेकिन मनव्वर फारुकी की एक नहीं दो नहीं
करीब-करीब सभी कार्यक्रम रद्द होना जाहिर करता है कि मुल्क में बुनियादी अधिकारों
और फ्रीडम ऑफ स्पीच पर डाका डाला जा चुका है। इंडिया भारत का संविधानिक नाम है और
मेरा भारत कभी हिन्दुस्तान नहीं हो सकता। भारत के हिन्दुस्तान होने में दलील दी
जाती है कि देश में हिन्दी बोली जाती है। इसलिए हम हिन्दुस्तानी है। इसके अलावा
हिन्दु का कोई दूसरा मतलब नहीं मिलता। देश में गुरमखी भी बोली जाती है। पंजाब से
लेकर दिल्ली तक। दिल्ली के साथ-साथ राजस्थान के कुछ हिस्से, यूपी के कई इलाके और
दूर-दराज बंगाल के कुछ इलाकों में पंजाब बसते हैं और पंजाबी बोलते हैं। इसी तरह से
मराठी, कन्नड, तेलगू, मलयालम सहित कई भाषाएं मुल्क में हैं। इसलिए मेरा मुल्क भारत
है। हिन्दुस्तान नहीं।
-मनोज नैय्यर
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